देहरादून/चमोली
विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टनल में हुए हादसे के बाद सोमवार को परियोजना स्थल पर हालात तनावपूर्ण नजर आए जिसके चलते मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों से प्रदर्शनकारियों की झड़प भी हुई।
सुरंग दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये और घायलों को एक लाख रुपये की अनुग्रह राशि दिए जाने की जानकारी सामने आने के बाद
सरकार और परियोजना प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए
मजदूरों और स्थानीय लोगों द्वारा जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित सहायता राशि को अपर्याप्त बताते हुए एक करोड़ मुआवजा राशि देने व पीड़ित परिवार के एक परिजन को नौकरी देने की मांग रखी।
बड़ी संख्या में मजदूर और स्थानीय लोग परियोजना स्थल पर एकत्र हो गए। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा देने के साथ ही घायलों के बेहतर उपचार और प्रभावित परिवारों के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान आपदा मंत्री मदन कौशिक का भी लोगों के विरोध स्वरूप उनका घेराव किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन और नियमित सुरक्षा ऑडिट किया जाना जरूरी है।
लोगों ने हादसे की निष्पक्ष जांच कराने, दुर्घटना के कारणों का पता लगाने और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
मुआवजे को लेकर विवाद उस समय बढ़ गया जब टीएचडीसी की ओर से पांच लाख रुपये मृतकों के परिजनों और एक लाख रुपये घायलों को देने संबंधी पत्र की जानकारी मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पांच लाख रुपये की सहायता राशि पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सरकार से परियोजना प्रबंधन के साथ मिलकर मुआवजे की राशि पर पुनर्विचार करने की मांग की।
साथ ही कहा कि क्षेत्र में जल विद्युत परियोजना से रोजगार और विकास की उम्मीद है, लेकिन परियोजना में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा से समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
परियोजना स्थल पर काफी देर तक विरोध और नारेबाजी होती रही। प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की बात को सुना।
हादसे के बाद मुआवजा, श्रमिक सुरक्षा और जिम्मेदारी तय करने को लेकर उपजे इस विवाद ने परियोजना प्रबंधन के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गौरतलब है कि 13 अगस्त को टीएचडीसी की टनल में पानी और मलबा भरने से आठ मजदूरों की मौत हो चुकी है। जबकि दो लापता मजदूरों की तलाश अब भी जारी है।
14 अगस्त को सीएम धामी ने घटनास्थल और अस्पताल पहुंचकर घायल मजदूरों से बात करते हुए हरसम्भव मदद का आश्वासन दिया था। डीएम व एसपी सुरजीत पंवार ने घटना के दिन आवश्यक मदद करने की बात कही थी। इसके अलावा सांसद अनिल बलूनी ने भी प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था।
वहीं दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोदियाल ने टीएचडीसी व प्रदेश सरकार से उचित मुआवज़ा देने की मांग करते हुए सुरक्षा मानकों की जांच की भी बात कही है।
बहरहाल जल विद्युत परियोजनाओं के इर्द गिर्द बने डंपिंग ज़ोन से प्राकृतिक झरनों की निकासी पर गतिरोध भी दुर्घटना का एक कारण माना जा रहा है।
स्थानीय वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र रावत के अनुसार इस इलाके में मौजूद प्राकृतिक झरनों का पानी पूर्व निर्धारित रूट से डाइवर्ट होकर सुरंग के आसपास इकठ्ठा होता चला गया जो कि संभवतः यहां पर अपना प्रभाव दिखा रहा है।
फिलहाल, टीएचडीसी प्रबंधन व राज्य सरकार की जांच के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारण सामने आ पाएंगे।