देहरादून
वीरवार को कांग्रेस मुख्यालय पर प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह एवं चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ हरक सिंह रावत ने संयुक्त रूप से पत्रकारों को संबोधित किया।
इस दौरान अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा अपने जनदिवस के अवसर पर दीपोत्सव मनाने पर तीखा हमला बोला उन्होंने कहा कि जिस देश में महंगाई चरम पर है आम आदमी के घर में दो वक्त का चूल्हा भी जलना मुश्किल हो रहा है उस समय मोदी जी के लिए डीप जलाने और अपने आपको उनका सच्चा भक्त दिखाने के होड़ लगी हुई है और हज़ारो टन तेल की आहुति देने को नेता तैयार हैं, अगर ये दीपक देश की जनता उनके कामो से ख़ुश होकर जलाती तो बात अलग थी,उन्होंने कहा कि देश के युवाओं के साथ छल करने का काम इस देश के प्रधानमंत्री ने किया है,उन्होंने कहा कि अग्निवीर योजना स्थायी रोजगार के अवसरों को सीमित करने वाली योजना है।
देश के लाखों युवा सेना में स्थायी नौकरी की उम्मीद लेकर भर्ती की तैयारी करते हैं, लेकिन अग्निवीर व्यवस्था में अधिकांश युवाओं का सैन्य करियर चार वर्ष बाद समाप्त हो जाता है।
1. चार वर्ष की सेवा के बाद भविष्य की अनिश्चितता
युवा 17-18 वर्ष की उम्र में सेना में प्रवेश करता है और चार वर्ष बाद लगभग 21-22 वर्ष की उम्र में उसे दोबारा रोजगार की तलाश करनी पड़ सकती है। कांग्रेस का सवाल है कि इतने कम समय में युवा अपने परिवार और भविष्य को किस प्रकार सुरक्षित करेगा?
स्थायी सैनिक और अग्निवीर में असमानता का सवाल बहुत महत्वपूर्ण है,
जब दोनों देश की सुरक्षा के लिए समान जोखिम उठाते हैं, तो सेवा की अवधि, वेतन, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा के मामले में इतना बड़ा अंतर क्यों?
सेना केवल नौकरी नहीं, जीवनभर की जिम्मेदारी और सम्मान है।
सैनिक को केवल चार वर्ष के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी मानना उचित नहीं। सेना में अनुभव, अनुशासन और विशेषज्ञता वर्षों की सेवा से विकसित होती है।
पत्रकार बंधुओं को संबोधित करते हुए प्रीतम सिंह ने कहा की अग्निवीर योजना का उत्तराखंड के युवाओं पर विशेष प्रभाव पड़ा है,उत्तराखंड की सैन्य परंपरा अत्यंत गौरवशाली रही है। राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों के हजारों परिवार सेना में रोजगार को पीढ़ियों से अपनी आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा का आधार मानते रहे हैं। अग्निवीर व्यवस्था का उत्तराखंड के युवाओं और सैन्य परिवारों पर विशेष प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को ‘पक्की नौकरी’ चाहिए, चार साल का इंतजार नहीं।
आज देश में बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं की कठिनाई के बीच युवा वर्षों तक तैयारी करता है। चार वर्ष की सेवा के बाद फिर से रोजगार की दौड़ में लौटना उसके लिए गंभीर चुनौती है।
पेंशन और सामाजिक सुरक्षा का प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है उन्होंने सवाल उठाया कि लंबे समय तक देश की सेवा करने वाले सैनिकों और चार वर्ष बाद सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की पर्याप्त एवं दीर्घकालिक व्यवस्था क्या है?
75 प्रतिशत युवाओं का क्या होगा इस प्रश्न का उत्तर आज तक नहीं मिल पाया है,
योजना की सबसे बड़ी चिंता यही है कि नियमित सेवा में सीमित संख्या में युवाओं के चयन के बाद शेष युवाओं के लिए रोजगार का स्थायी रोडमैप क्या है। सरकार स्पष्ट करे कि सेवा से बाहर होने वाले अग्निवीरों के लिए कितनी स्थायी नौकरियां सुनिश्चित कैसे होगी।
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ हरक सिंह रावत ने कहा की केवल अलग-अलग विभागों में आरक्षण अथवा प्राथमिकता की घोषणा पर्याप्त नहीं है। कांग्रेस सरकार से वास्तविक नियुक्तियों का आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग करे।
उन्होंने कहा की उत्तराखंड एक सैन्य बाहुल्य राज्य है यहाँ हर घर में एक सैनिक है जब यहाँ कोई शहीद होता है तो उसकी माता पिता बहन सब गौरवान्वित महसूस करते हैं अग्निवीर योजना देश के और प्रदेश के युवाओं की भावनाओं के साथ खेलने जैसा है,सेना की भर्ती को रोजगार के आंकड़े सुधारने का माध्यम न बनाया जाए।
सेना राष्ट्र की सुरक्षा का सर्वोच्च संस्थान है। भर्ती नीति का उद्देश्य मजबूत, प्रशिक्षित और अनुभवी सैन्य बल तैयार करना होना चाहिए।
युवाओं के साथ वादाखिलाफी का आरोप
कांग्रेस का कहना है कि जिन युवाओं ने वर्षों तक सेना में स्थायी भर्ती की तैयारी की, उनके लिए भर्ती व्यवस्था को अचानक बदलना उनके भविष्य के साथ अन्याय है।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमित भर्ती की मांग की सेना की नियमित भर्ती प्रक्रिया को मजबूत किया जाए, रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरा जाए और युवाओं को पर्याप्त भर्ती अवसर दिए जाएं।उत्तराखंड के लिए विशेष भर्ती नीति की मांग
प्रदेश कांग्रेस यह मांग रख सकती है कि सैन्य बहुल राज्य उत्तराखंड के युवाओं के लिए सेना में नियमित भर्ती के पर्याप्त अवसर सुनिश्चित किए जाएं तथा अग्निवीरों के पुनर्वास की विशेष नीति बनाई जाए।
सेवा से बाहर होने वाले युवाओं के लिए ‘रिहैबिलिटेशन पैकेज’ की घोषणा करनी चाहिए,
सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल राम रतन नेगी ने कहा की पहले 80000 प्रति साल युवाओं को रोजगार मिलता था जो अब घट कर 47000 रह गए हैं, जिसमे अगर सिर्फ 25% को अब्सोर्ब करेंगे तो इसका मतलब ये हुआ की सिर्फ 12000 युवा प्रति वर्ष स्थाई नौकरी पा रहे हैं सेना में जहाँ पहले ये आकड़ा एक लाख पार था ये डेटा 2023 का सरकार का है, उन्होंने कहा कि सरकार
सरकार स्पष्ट करे कि चार वर्ष बाद सेवा से बाहर होने वाले युवाओं को उच्च शिक्षा, सरकारी नौकरी, तकनीकी प्रशिक्षण, स्वरोजगार और बैंक ऋण में क्या ठोस सुविधाएं दी जा रही हैं।
कांग्रेस देश की मजबूत सेना और युवाओं के सम्मानजनक रोजगारकृदोनों के पक्ष में है। हमारा विरोध सेना या सैनिकों से नहीं, बल्कि ऐसी भर्ती व्यवस्था से है जो युवाओं के भविष्य को अनिश्चित बनाती है सरकार बताए कि चार वर्ष बाद सेवा से बाहर होने वाले युवाओं का रोजगार का पक्का इंतजाम क्या है?
अब तक कितने अग्निवीरों को चार वर्ष बाद स्थायी सरकारी रोजगार मिला?
सेना में नियमित भर्ती के रिक्त पद कब तक भरे जाएंगे?उत्तराखंड के कितने युवाओं ने अग्निवीर योजना के माध्यम से भर्ती पाई और उनमें से कितनों को आगे स्थायी सेवा मिली?
1. क्या सरकार अग्निवीर योजना की स्वतंत्र समीक्षा कराने को तैयार है?
2. क्या सरकार अग्निवीरों को भविष्य में नियमित सैनिकों के समान सम्मानजनक सेवा-सुरक्षा देने पर विचार करेगी?
“देश के युवाओं को चार साल की नौकरी नहीं, सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य चाहिए। सेना को प्रयोगशाला नहीं बनाया जा सकता। अग्निवीरों के भविष्य की गारंटी सरकार को देनी होगी। कांग्रेस युवाओं के रोजगार, सैनिकों के सम्मान और देश की मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के लिए अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी।
पत्रकार वार्ता में पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, महिला प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला, प्रदेश प्रवक्ता डॉ प्रतिमा सिंह आदि उपस्थित थे।