देहरादून
सीटू (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स), देहरादून द्वारा आज जिलाधिकारी देहरादून को ज्ञापन सौंपकर रफेल होम प्रबंधन द्वारा कर्मचारी सुनील मैसी एवं उनके परिवार के साथ किए जा रहे कथित उत्पीड़न पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि सुनील मैसी की सेवा समाप्ति का मामला सक्षम श्रम प्राधिकारी के समक्ष विचाराधीन है। इसके बावजूद प्रबंधन द्वारा उन पर आवंटित आवास जबरन खाली कराने का दबाव बनाया जा रहा है तथा पानी का कनेक्शन काटकर और अन्य मूलभूत सुविधाओं से वंचित कर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
सीटू ने यह भी आरोप लगाया कि सुनील मैसी की पत्नी, जो उसी संस्थान में ट्रेनर के पद पर कार्यरत थीं, की सेवा भी 30 जून 2026 को समाप्त कर दी गई। साथ ही उनके लगभग 14 माह के वेतन एवं ग्रेच्युटी का भुगतान अब तक नहीं किया गया है।
संगठन ने कहा कि लगातार उत्पीड़न के कारण परिवार गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रहा है और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। संगठन ने जिलाधिकारी से मांग की कि श्रम कानूनों एवं औद्योगिक विवाद अधिनियम के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा वाद लंबित रहने तक कर्मचारी को आवंटित आवास से बेदखल करने और मूलभूत सुविधाएँ काटने जैसी कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए। सीटू ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन द्वारा शीघ्र हस्तक्षेप कर प्रबंधन की कथित अवैध कार्रवाइयों पर रोक नहीं लगाई गई, तो संगठन आंदोलन, धरना-प्रदर्शन एवं अन्य लोकतांत्रिक संघर्षों के लिए बाध्य होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रबंधन एवं प्रशासन की होगी। जिलाधिकारी की ओर से ज्ञापन अपर सिटी मजिस्ट्रेट श्री ज्वान्टा ने लिये तथा आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया।
इस अवसर सीआईटीयू अध्यक्ष एस एस नेगी, महामंत्री लेखराज, सीआईटीयू नेता हिमांशु चौहान, एआईएलयू की नेता एडवोकेट अनुराधा एडवोकेट यादव, आयूपी अध्यक्ष नवनीत गुंसाई सीपीएम सचिव अनन्त आकाश, एस एफ आई के प्रदेश अध्यक्ष नितिन मलेठा, उत्तराखण्ड आन्दोलन कारी अम्बुज शर्मा, सुरेश कुमार, चिन्तन सकलानी, पीडित परिवार आदि बडी संख्या में लोग शामिल थे।