दुनिया की सबसे बड़ी यात्राओं में शामिल कांवड़ यात्रा अपने चरम पर

देहरादून/हरिद्वार

दुनिया की बड़ी धार्मिक यात्राओं में एक, सालों से निरंतर चलने वाली कांवड़ यात्रा अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। डाक कांवड़ यात्रा के अंतिम दिनों में हरिद्वार में शिवभक्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु गंगाजल लेने के लिए धर्मनगरी हरिद्वार पहुंच रहे हैं।

उत्तराखंड सरकार की ओर से कांवड़ यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और सुचारु यात्रा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने यात्रा मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाओं सहित अन्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे है।

लुधियाना से यात्रा पर आए एडवोकेट मोहित अग्रवाल ने अपना कांवड़ यात्रा का अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह हर साल गंगा जल लेने हरिद्वार आते है।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष उत्तराखण्ड सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कांवड़ियों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं की गई है, जिससे सभी कांवड़ियों की यात्रा को सुखमय बनाया गया है।

हरियाणा करनाल की शिवभक्त संदीप कुमार ने कहा कि वह 10-15 साल से निरन्तर कांवड़ लेने हरिद्वार आ रहा हूं। इस साल जिला प्रशासन एवं उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने जगह-जगह मेडिकल कैंप, पानी, शौचालय, लाइट खाने की सभी व्यवस्थाएं अच्छी तरह से की गई है इसके लिए जिला प्रशासन एवं उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री का दिल से आभार व्यक्त करते है।

कांवड़ यात्रा पर आई सोनिया ने कहा कि कांवड़ियों के लिए उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री द्वारा सभी व्यवस्थाएं ठीक ढंग से की गई है जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त करते है।

सहारनपुर उत्तर प्रदेश से आए अनिकेत कुमार ने कहा कि सभी जगह शौचालय, पानी लंगर एवं लाइट की व्यवस्था अच्छी तरह से की गई है इसके लिए उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री का हाथ जोड़कर बहुत बहुत धन्यवाद।

कांवड़ यात्रियों ने कहा कि इस बार यात्रा मार्गों पर सफाई व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम और पानी की सुविधा पहले से काफी बेहतर दिखाई दे रही है। शिवमय हुई धर्मनगरी हरिद्वार में श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जिला प्रशासन व पुलिस की ओर से की गई व्यवस्थाओं के लिए आभार व्यक्त किया।

श्रद्धालुओं ने कहा कि बेहतर प्रबंधन और सेवाभाव के कारण कांवड़ यात्रा का अनुभव और भी यादगार बन गया है।

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