लदेहरादून
हिमवंत कवि चन्द्र कुंवर बर्त्वाल के 106 वीं जयंती चौपाल कार्यालय देहरादून में मनाई गई। हिमवंत कवि चन्द्र कुंवर बर्त्वाल शोध संस्थान इस वर्ष भी पिछले कई वर्षो की भाति हिमवन्त कवि की जयंती मनाई गई। प्रकृति के चितेरे कवि के द्वारा हिन्दी साहित्य को सौंपी गई अमूल्य निधि पर काव्य गोष्ठी में चर्चा की गई काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता हिमवंत कवि चन्द्र कुवंर बर्त्वाल शोध संस्थान के अध्यक्ष मनोहर सिंह रावत करते हुए कहा कि चन्द्रकुंवर बर्त्वाल और सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला एक समान कवि थे, जिस रोग से सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला पीड़ित थे उसी रोग से चन्द्र कुंवर भी पीड़ित थे। काव्य गोष्ठी मे उनकी कविताओं का वाचन किया गया जिसमे मुख्य रुप से गिरधर पड़िंत व ड़ा पुष्पा खडूरी द्वारा हिमवंत कवि चन्द्र कुवंर बर्त्वाल के काव्य का गायन किया।
कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि सहित संयुक्त रूप से हिमवंत कवि की स्मारिका का विमोचन किया
कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि चौपाल सयोजक सुरेंद्र कुमार ने कहा कि हिमवंत कवि चन्द्र कुवंर बर्त्वाल जीवन के मात्र 28 वसंत का जीवन जीने तथा प्रतिकूल परिस्थितियों में रहकर भी हिंदी जगत को एक विशाल काव्य भंडार देने वाले हिमवंत कवि चंद्र कुमार बर्त्वाल की आज 20 अगस्त को जयंती के अवसर पर हम सब आज यहाँ एकत्रित हुए है। उन्होंने हिमवंत कवि के जीवन पर प्रकाश ड़ालते हुए कहा रुद्रप्रयाग जिले के तल्ला नागपुर पट्टी के प्रसिद्ध मालकोटी गाँव में 20 अगस्त सन 1919 को भोपाल सिंह एवं श्रीमती जानकी देवी के घर में चंद्र कुँवर का जन्म हुआ। इनकी प्रारंभिक शिक्षा उडामांडा प्राथमिक स्कूल और मिडिल शिक्षा नागनाथ (पोखरी) से हुई। बाद में पौड़ी, देहरादून और इलाहाबाद से उच्च शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन से ही उन्होंने कविता लिखनी प्रारंभ की।
कार्यक्रम मे विशिष्ट अतिथि राजेंद्र प्रसाद रतूड़ी (निर्मल) ने उनकी एक कविता सुनाकर अपना वक्तव्य शुरू किया और कहा कि हिमवंत कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल जी की प्रमुख प्रसिद्ध कृतियां के बारे मे बताया नंदिनी, पयस्विनी, विराट ज्योति, हिमवंत का एक कवि, काफल पाक्कू, हिरण्यगर्भ, गीत माधवी, साकेत, उदय के द्वारों पर, प्रणयिनी, हिम ज्योत्सना आदि।
सीपीआई से समर भंडारी ने कहा कि हिमवंत कवि के बारे मे बताया कि उनके मित्र शंभू प्रसाद बहुगुणा ने उनकी विलुप्त हो रही रचनाओं को प्रकाशित किया। तभी से काव्य जगत में चंद्र कुंवर का दूसरा नाम हिमवंत कवि प्रसिद्ध हुआ।
इलाहाबाद में क्षय रोग से बीमार होने के बाद वे अपने गाँव मालकोटी लौट आये। कुछ समय उन्होंने अगस्त्यमुनि मिडिल स्कूल में अध्यापन कार्य किया और बाद में अपने नए गाँव कंचनगंगा और मंदाकिनी के तट पर स्थित पंवालिया (भीरी) में रहने लगे। वहीं उन्होंने अनेक रचनाओं की रचना की, जिन्हें देश की प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं ने प्रकाशित किया।
ट्रेड यूनियन नेता जगदीश कुकरेती ने कहा कि पंवालिया में ही कवि ने अपने जीवन का अंतिम समय बिताया। उन्हें अपनी मृत्यु का आभास हो गया था।
काव्य गोष्टी का संचालन संस्थान के उपाध्यक्ष मोहन सिंह नेगी ने किया व अध्यक्षता हिमवंत कवि चन्द्र कुवंर बर्त्वाल शोध संस्थान के अध्यक्ष मनोहर सिंह रावत ने किया।
काव्य गोष्ठी मे मुख्य वक्ता कुसुम रावत, समर भण्ड़ारी, जगदीश कुकरेती, द्विजेन्द्र बहुगुणा, वीरेंद्र दत्त, सत्यप्रकाश चौहान, निरंजन सुयाल, ललित बिष्ट, ललित ओझा, हरिओम पाली, विजय पाहवा, डॉ गोविल, नरेंद्र बिष्ट, राकेश सती, विनोद खंडूरी, जमन सिंह बिष्ट, राजेश रावत आदि थे।